दुनिया में सबसे बड़ी योद्धा माँ होती है

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Happy Birthday Maa!

दुनिया में सबसे बड़ी योद्धा माँ होती है।

मेरी माँ का जन्म पटना में हुआ था। एक अधिकारी की पुत्री होने के वाबजूद उस वक्त के प्रचलन के अनुसार मेरी माँ का विवाह कम उम्र में मेरे पिताजी के साथ गंगा दशहरा के दिन सम्पन्न हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा पटना के नोट्रेडेम अकादमी से पूर्ण की। हमेशा से मेधावी छात्रा थीं।

हमेशा सुनता आया हूँ कि हर सफल पुरुष की सफलता के पीछे एक औरत का हाथ होता है परंतु किसी ने मुझे यह नही बताया कि हर सफल महिला के पीछे संघर्ष की एक ऐसी गाथा होती है जो हम साधारण जीवों के समझ से पड़े है।

शादी के बाद मेरी माँ ने इंटर, स्नातक और स्नातकोत्तर किया। मेरे पिता के बार-बार स्थानांतरण के कारण उन्हें हमेशा नए तरीक़े से अपने घर को स्थापित करना होता था और निहसंदेह उनकी पढ़ाई में बाधा उत्तपन्न होती होगी। परंतु उस वक्त भी मेरी माँ श्रीमती अनिता कुणाल मज़बूत इच्छाशक्ति वाली महिला थी। धीरे-धीरे उनके आगे सारी परेशनियाँ विफ़ल साबित होती गयीं।

पिताजी (किशोर कुणाल) एक बार दिल्ली में पदस्थापित थे, वहाँ अक्सर विट्ठल भगवान की मूर्ति के समक्ष ध्यान किया करते थे। उन्हें स्वप्न में भगवान ने आदेश दिया कि वह एक विद्यालय स्थापित करें। उन्होंने इसकी चर्चा माँ से की। सपने देखने में अच्छे लगते है पर उन्हें पूरा करने के लिए पूँजी की आवश्यकता होती है। पटना में उस वक्त गिने-चुने ही विद्यालय थे।

मेरी माताजी ने अपने विवाह में मिले स्त्री धन गिरवी रख ऋण का प्रबंध किया और पटना के कंकड़बाग़ में किराए के एक भवन में ज्ञान निकेतन विद्यालय की उन्होंने शुरुआत की।

36 वर्षों में माँ ने एक दिन भी छुट्टी नहीं लिया और आज ज्ञान निकेतन विद्यालय समूह उत्तर भारत के अग्रणी विद्यालयों में से एक है। यहाँ गरीब बच्चों को फ़्रीशिप भी मिलती है। इस विद्यालय ने देश को कई टॉपर दिए हैं।

माँ की जीवन यात्रा से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला है। दुनिया में सबसे पूजनीय कार्य अगर कुछ है तो वह अपनी कोख में और फिर इस संसार में अपने बच्चे को अपने खून पसीने से सिंचना। मेरी माँ यहीं नही रुकी। उन्होंने हज़ारों बच्चों को शिक्षा संस्कार दे उन्हें समाज में उत्कृष्ट योगदान देने लायक़ बनाया है। एक बात और, आप जिन किशोर कुणाल का इतना सम्मान करते हैं, उनके इस विराट रूप के निर्माण में भी छोटी मगर महत्वपूर्ण भूमिका श्रीमती अनिता कुणाल ने निभाई है। मैं उन सभी माताओं के सामने नतमस्तक हूँ जो अपने परिवार को सम्भालने के साथ समाज में बदलाव लाने की पहल करती हैं। माँ से मैंने सत्यवादिता, सहानुभूति, साहस जैसे कुछ मूल्य सीखें हैं।

मेरा मानना है की बच्चों को अपनी माँ से कोई अपेक्षा नही रखनी चाहिए बस समर्पित भाव से माँ की सेवा करनी चाहिए। जन्मदिवस की बधाई हो, माँ।

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