राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी की जयंती पर सिमरिया जाकर उनकी जन्मभूमि को नमन किया
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी की जयंती पर सिमरिया जाकर उनकी जन्मभूमि को नमन किया और उनके परिवारजनों से भेंट कर दिनकर जी की स्मृतियों को याद किया। बचपन से ही उनकी कविताएँ पढ़ता आया हूँ और उनकी रचनाओं ने हमेशा साहस, स्वाभिमान और राष्ट्रचेतना की प्रेरणा दी है।









उनकी पंक्तियाँ— “पर फिरा हमें गांडीव-गदा, लौटा दे अर्जुन-भीम वीर” —आज भी विवेक के साथ शक्ति और साहस का महत्व समझाती हैं।दिनकर जी के नाम पर विश्वविद्यालय का प्रस्ताव पारित होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह केवल उनके प्रति सम्मान नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को उनके विचारों, साहित्य और राष्ट्रचेतना से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास होगा।इस अवसर पर हमारे साथ शानू जी भी उपस्थित रहे। राष्ट्रकवि दिनकर जी को शत्-शत् नमन।